By: The Trek News Desk
चिली में राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा सामने आ गया है, जहां कट्टर दक्षिणपंथी नेता जोस एंटोनियो कास्ट ने निर्णायक जीत दर्ज करते हुए देश के अगले राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ कर लिया है. आधिकारिक नतीजों के अनुसार, कास्ट को रनऑफ चुनाव में करीब 58 प्रतिशत वोट मिले, जबकि वामपंथी उम्मीदवार जियानेट जारा को लगभग 42 प्रतिशत मतों से संतोष करना पड़ा. हार स्वीकार करते हुए जारा ने कास्ट को बधाई दी और चिली के हित में उनके सफल कार्यकाल की कामना की.
रविवार को हुए इस चुनाव में 95 प्रतिशत से अधिक मतों की गिनती पूरी हो चुकी थी, जिसके बाद कास्ट की बढ़त निर्णायक मानी गई. चुनाव परिणामों के साथ ही चिली में बीते 35 वर्षों में सबसे मजबूत दक्षिणपंथी नेतृत्व की वापसी मानी जा रही है.
जोस एंटोनियो कास्ट ने अपने चुनाव अभियान के दौरान बढ़ते अपराध, अवैध प्रवासन और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने सीमा पर दीवार निर्माण, अपराध-प्रभावित इलाकों में सेना की तैनाती और अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को देश से बाहर भेजने जैसे सख्त प्रस्ताव रखे, जो मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को आकर्षित करने में सफल रहे.
यह कास्ट का राष्ट्रपति पद के लिए तीसरा प्रयास और दूसरा रनऑफ था. वर्ष 2021 में वे वामपंथी राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक से हार गए थे. उस समय उन्हें कई मतदाता बेहद कट्टर मानते थे, लेकिन हाल के वर्षों में अपराध और अवैध प्रवासन को लेकर बढ़ी चिंताओं ने उनके पक्ष में माहौल बना दिया.
रविवार शाम सैंटियागो में कास्ट के चुनावी मुख्यालय के बाहर समर्थकों ने चिली के झंडे लहराकर जश्न मनाया. कुछ समर्थक “मेक चिली ग्रेट अगेन” लिखी लाल टोपी पहने नजर आए.

हालांकि, कास्ट के सामने संसद में चुनौतियां बनी रह सकती हैं. नवंबर में हुए संसदीय चुनावों के बाद कांग्रेस बंटी हुई है. सीनेट में वाम और दक्षिणपंथी दलों की संख्या लगभग बराबर है, जबकि निचले सदन में निर्णायक भूमिका पॉपुलिस्ट पीपल्स पार्टी की है. ऐसे में उनके कुछ कड़े प्रस्तावों को विरोध का सामना करना पड़ सकता है.
चिली दुनिया का सबसे बड़ा तांबा उत्पादक और लिथियम का प्रमुख निर्यातक है. कास्ट की बाजार समर्थक और कम नियमन वाली नीतियों की उम्मीद में स्थानीय शेयर बाजार, पेसो और इक्विटी सूचकांकों में पहले ही सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है.
हालांकि कास्ट गर्भपात और आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों के विरोध में मुखर रहे हैं, लेकिन इन कानूनों में बदलाव के लिए उन्हें कांग्रेस में बहुमत का समर्थन हासिल करना होगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी जीत न केवल चिली में बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथ के उभार का एक और संकेत है.
Source: News Agencies

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