चाबहार पोर्ट पर भारत को अमेरिका से छह महीने तक प्रतिबंधों से छूट: विदेश मंत्रालय

By: The Trek News Desk

भारत को ईरान के चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) परियोजना पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की अस्थायी छूट मिल गई है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वॉशिंगटन के साथ इस परियोजना और संबंधित व्यापारिक समझौतों पर बातचीत जारी है.

रणनीतिक दृष्टि से अहम परियोजना

ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित चाबहार पोर्ट भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र है. यह भारत का अरब सागर तक सीधा समुद्री मार्ग प्रदान करता है, वह भी पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए.

इस पोर्ट का उद्देश्य भारत को अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान और कज़ाख़स्तान जैसे मध्य एशियाई देशों से जोड़ना है, जिससे व्यापारिक मार्ग छोटा, तेज़ और अधिक विश्वसनीय बन सके.

अमेरिका की नई नीति और छूट की पृष्ठभूमि

ट्रंप प्रशासन ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह 2018 में दी गई चाबहार परियोजना पर प्रतिबंध से छूट को वापस लेने जा रहा है. इसका अर्थ था कि सितंबर 29 से चाबहार पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध लागू हो जाते.
हालांकि, भारत के साथ जारी उच्चस्तरीय बातचीत के बाद वॉशिंगटन ने इस फैसले पर पुनर्विचार करते हुए छह महीने की नई छूट देने का निर्णय लिया.

विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह छूट भारत के लिए “महत्वपूर्ण राहत” है, क्योंकि चाबहार परियोजना भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अभिन्न हिस्सा है.

चाबहार का रणनीतिक महत्व

भारत चाबहार के माध्यम से न केवल अफगानिस्तान तक व्यापार बढ़ाना चाहता है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) का अहम बिंदु भी मानता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बंदरगाह चीन के ग्वादर पोर्ट (जो पाकिस्तान में है) के मुकाबले भारत को एक वैकल्पिक रणनीतिक बढ़त देता है.

अगले कदम

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि भारत और अमेरिका के बीच इस विषय पर व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (Comprehensive Economic Partnership) पर भी चर्चा चल रही है, जिसमें ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे से जुड़े विषय शामिल हैं.

MEA प्रवक्ता ने कहा, “भारत और अमेरिका दोनों यह समझते हैं कि चाबहार केवल एक बंदरगाह नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास का माध्यम है. इस दिशा में सहयोग जारी रहेगा.”

Source: News Agencies

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