By: The Trek News Desk
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड में कथित “रूसी खतरे” को लेकर डेनमार्क और नाटो पर निशाना साधते हुए कहा है कि अब इस मुद्दे पर निर्णायक कार्रवाई की जाएगी. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, “अब वक्त आ गया है, और यह काम होकर रहेगा.”
रविवार (18 जनवरी 2026) को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा कि नाटो पिछले 20 वर्षों से डेनमार्क को यह चेतावनी देता रहा है कि ग्रीनलैंड से रूसी प्रभाव को दूर करना ज़रूरी है, लेकिन डेनमार्क इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने में असफल रहा है.
उन्होंने अपने बयान में कहा कि डेनमार्क की इस कथित नाकामी के कारण अब अमेरिका को आगे आना पड़ेगा. हालांकि, इस बयान पर, यूरोपीय संघ में डेनमार्क की अध्यक्षता या डेनमार्क के विदेश मंत्रालय की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.
गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी कई बार यह कह चुके हैं कि वह ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लाना चाहते हैं और इस मुद्दे पर किसी समझौते से कम पर तैयार नहीं होंगे. वहीं, डेनमार्क और ग्रीनलैंड, दोनों के नेताओं ने दोहराया है कि ग्रीनलैंड न तो बिक्री के लिए है और न ही वह अमेरिका का हिस्सा बनना चाहता है.
इससे एक दिन पहले, शनिवार (17 जनवरी 2026) को ट्रंप ने यह भी धमकी दी थी कि जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की इजाज़त नहीं दी जाती, तब तक यूरोपीय सहयोगी देशों पर चरणबद्ध तरीके से भारी टैरिफ लगाए जाएंगे.
ट्रंप का तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस की बढ़ती गतिविधियों के कारण ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद अहम हो गया है. वहीं, डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों का कहना है कि ग्रीनलैंड पहले से ही नाटो की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत संरक्षित है.
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के आक्रामक रुख ने एक बार फिर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और गरमाने के आसार हैं.
Source: News Agencies
