By: The Trek News Desk
ग़ज़ा पट्टी में महीनों से चले आ रहे संघर्ष के बीच एक नई मानवीय पहल सामने आई है. इसराइल सरकार ने मिस्र और अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (ICRC) की टीमों को पहली बार ग़ज़ा के भीतर प्रवेश की अनुमति दी है ताकि वहाँ मारे गए इसराइली बंधकों के शवों की तलाश की जा सके.
यह खोज अभियान उस क्षेत्र में शुरू होगा जिसे इसराइल की सेना “येलो लाइन” कहती है, यह वही सीमांत इलाका है जहाँ तक इसराइली बल हाल ही में युद्धविराम समझौते के पहले चरण के तहत पीछे हटे हैं.
मानवीय मिशन के तहत संयुक्त प्रयास
इस अभियान में मिस्र के खोज दल और ICRC के मानवीय कार्यकर्ता भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर शवों की तलाश करेंगे.
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ हमास प्रतिनिधियों को भी सीमित रूप से इस क्षेत्र में आने की अनुमति दी गई है ताकि वे भी शवों की पहचान और पुनर्प्राप्ति में मदद कर सकें.
हमास ने अब तक 28 में से 15 इसराइली बंधकों के शव मिस्र और रेड क्रॉस के माध्यम से सौंपे हैं. समझौते की पहली शर्त के तहत समूह को सभी शव लौटाने हैं.
हमास का कहना है कि कई शव उन इलाकों में दबे हैं जो इसराइली बमबारी के दौरान पूरी तरह नष्ट हो गए.
ट्रम्प की सख्त चेतावनी
अमेरिका के राष्ट्रपति और मध्यस्थ डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर लिखा कि,
“हमास को शव तुरंत लौटाने चाहिए, वरना इस शांति प्रक्रिया से जुड़े देश कार्रवाई करेंगे.”
ट्रम्प ने कहा कि वे स्थिति पर “करीबी नज़र” रखे हुए हैं और उम्मीद है कि अगले 48 घंटों में प्रगति होगी.
राजनयिक संतुलन की चुनौती
मिस्र, क़तर और तुर्की ने इस ट्रम्प-समर्थित “ग़ज़ा शांति समझौते” पर इसी महीने शर्म-अल-शेख में हस्ताक्षर किए थे.
हालाँकि, इसराइल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय बल को ग़ज़ा में तभी तैनात किया जाएगा जब उसे इसकी अनुमति होगी.
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा,
“हम अपनी सुरक्षा पर किसी भी हाल में नियंत्रण नहीं छोड़ेंगे. कौन-सा देश ग़ज़ा में आएगा, यह निर्णय केवल इसराइल करेगा.”
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पुष्टि की कि कई देशों ने इस शांति बल में शामिल होने की इच्छा जताई है, लेकिन अंतिम मंज़ूरी इसराइल पर निर्भर करेगी. रिपोर्टों के मुताबिक, तुर्की की भागीदारी को लेकर इसराइल ने असहमति जताई है.
ग़ज़ा की तबाही और मानवीय संकट
संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, इसराइल के दो साल से जारी हमलों में ग़ज़ा का लगभग 84% हिस्सा मलबे में तब्दील हो चुका है.
हमास के अनुसार, मलबे के नीचे अभी भी कई शव दबे हैं, जिन्हें निकालने में कठिनाई आ रही है.
Source: News Agencies
