By: The Trek News Desk
कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में बुधवार को हुई हिंसक घटनाओं के बाद, लेह में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है. अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार सुबह तक कोई भी नई हिंसा की खबर नहीं आई है. हालांकि, प्रशासन ने दोनों क्षेत्रों, लेह और क़ारगिल में भारी सुरक्षा व्यवस्था के तहत 4 या उससे अधिक लोगों के इकठ्ठा होने पर पाबंदी लगा रखी है.
क़ारगिल में पूर्ण बंद
बुधवार को पुलिस की फायरिंग में चार लोगों की मौत के बाद, क़ारगिल में गुरुवार को एक पूर्ण बंद का आह्वान किया गया. यह बंद लेह के निवासियों के साथ एकजुटता व्यक्त करने और राज्य के दर्जे की मांग को लेकर किया गया था.
क़ारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA), जो कि राज्य और छठी अनुसूची सुरक्षा के लिए आंदोलन चला रहा है, ने यह आह्वान किया. क़ारगिल में भी प्रशासन ने लोगों के एकत्र होने पर रोक लगा दी है, और इलाके में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है.
KDA के सदस्य सज्जाद क़ारगिली ने कहा, “यह बंद शोक और एकजुटता का प्रतीक है, क्योंकि हमने लेह में हुई मौतों का विरोध किया है.” उन्होंने सभी से अपील की कि वे हिंसा से दूर रहें और शांति बनाए रखें. क़ारगिली ने कहा, “हमें यह याद रखना चाहिए कि हिंसा से किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता. हम अपने आंदोलन को हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से और संवाद के माध्यम से आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं.”
लेह में स्थिति सामान्य
लेह में, जहां बुधवार को हिंसा में चार लोग मारे गए थे और 50 से अधिक घायल हो गए थे, अब स्थिति सामान्य बताई जा रही है.
अधिकारियों के अनुसार, बुधवार शाम से अब तक कोई नई हिंसा की घटना नहीं हुई है. सुरक्षा बलों के अनुसार, क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और आईटीबीपी के जवान सड़कों पर तैनात हैं.
पुलिस ने बताया कि मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे और स्थानीय बीजेपी कार्यालय में आग लगा दी थी, जिसके बाद पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने की स्थिति बन गई.
सोनम वांगचुक का आह्वान
वहीं, सोनम वांगचुक, जो कि लद्दाख के लिए राज्य दर्जा और छठी अनुसूची की सुरक्षा के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, ने कहा कि वह अपनी मांगों को पूरी तरह शांतिपूर्वक और लोकतांत्रिक तरीके से उठाने के पक्ष में हैं. वह पहले ही भूख हड़ताल पर थे और प्रदर्शनकारियों को हिंसा से बचने की अपील कर चुके हैं.
कश्मीर में भी दुख व्यक्त
हुर्रियत के अध्यक्ष और कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने भी लेह में हुई हिंसा की निंदा करते हुए इसे 5 अगस्त 2019 के बाद के “परिणाम” के रूप में देखा. उन्होंने कहा, “कश्मीर और लद्दाख के लोग अब तक सरकार द्वारा किए गए वादों के बिना ही जी रहे हैं. हमें उम्मीद है कि लद्दाख के लोगों से किए गए वादे निभाए जाएंगे और भविष्य में ऐसी हिंसा से बचा जाएगा.”
लेह और क़ारगिल में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन प्रशासन ने किसी भी प्रकार की हिंसा से बचने के लिए सख्त कदम उठाए हैं. यह घटना इस बात का संकेत है कि लद्दाख की राजनीति और स्थानीय मांगों को समझने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को गंभीरता से विचार करना होगा.
Source: News Agencies
