एशिया-प्रशांत सम्मेलन से पहले उत्तर कोरिया ने परीक्षण करते हुए दागीं कई बैलिस्टिक मिसाइलें, तनाव बढ़ा

By: The Trek News Desk

APEC शिखर सम्मेलन से ठीक एक हफ्ते पहले उत्तर कोरिया ने बुधवार सुबह एक के बाद एक कई शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. दक्षिण कोरिया की सेना ने इस घटना की पुष्टि की है और चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में और भी मिसाइल परीक्षण हो सकते हैं

ये परीक्षण उस समय हो रहे हैं जब दक्षिण कोरिया की ऐतिहासिक नगरी ग्योंगजू अगले हफ्ते एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) सम्मेलन की मेज़बानी करने जा रही है, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य वैश्विक नेता भाग लेंगे.

पूर्वी सागर की ओर दागी गई मिसाइलें
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने कहा कि उन्होंने “कई प्रक्षेपास्त्रों” का पता लगाया जो पूर्वी सागर (जिसे जापान सागर भी कहा जाता है) की ओर छोड़े गए थे. शुरूआत में माना गया था कि ये मिसाइलें समुद्र में गिरीं, लेकिन बाद में सेना ने जानकारी दी कि ये लगभग 350 किमी तक उड़ान भरने के बाद उत्तर कोरिया के ही भीतर गिरीं.

सेना ने कहा, “हमने अतिरिक्त परीक्षणों की आशंका के चलते निगरानी बढ़ा दी है और अमेरिका तथा जापान के साथ सूचनाएं साझा करते हुए अपनी तैयारियों को मजबूत बनाए रखा है.”

नए राष्ट्रपति के कार्यकाल में पहली मिसाइल परीक्षण
यह मिसाइल परीक्षण दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति ली जे म्युंग के कार्यकाल में पहली बार हुआ है, जो जून में पदभार संभालने के बाद पहली बार उत्तर कोरिया के ऐसे सैन्य कदम का सामना कर रहे हैं. इससे पहले उत्तर कोरिया ने मई में मिसाइल परीक्षण किए थे.

राजनीतिक संदेश देने की कोशिश?
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया इस मिसाइल परीक्षण के जरिए राजनीतिक संदेश देना चाहता है. सियोल की इवाह वीमेंस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पार्क वोन-गॉन ने एएफपी को बताया, “यह किम जोंग उन की रणनीति है कि जब भी कोई बड़ा वैश्विक कार्यक्रम सियोल में होता है, तो वे अपने अस्तित्व और ताकत का प्रदर्शन करते हैं.”

कुछ दिन पहले ही उत्तर कोरिया ने एक विशाल सैन्य परेड में अपनी नई लंबी दूरी की ह्वासोंग-20 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का प्रदर्शन किया था, जिसे अब तक का सबसे शक्तिशाली हथियार बताया जा रहा है. इस परेड में चीन, रूस सहित कई देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे.

परमाणु हथियारों को लेकर अड़ियल रुख
प्योंगयांग पहले ही साफ कर चुका है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को नहीं छोड़ेगा. उत्तर कोरिया का तर्क है कि उसकी सैन्य क्षमताएं अमेरिका और दक्षिण कोरिया से संभावित हमलों से खुद को बचाने के लिए आवश्यक हैं.

डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच पहले भी बातचीत हो चुकी है. ट्रंप ने हाल ही में कहा कि वे इस वर्ष के अंत तक किम से फिर मिलने की उम्मीद रखते हैं. प्योंगयांग की ओर से संकेत मिले हैं कि किम इस बातचीत के लिए खुले हैं, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों को नहीं छोड़ेगा.

आगे क्या?
APEC शिखर सम्मेलन जैसे बड़े मंच के दौरान उत्तर कोरिया के ऐसे कदम वैश्विक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं. आने वाले दिनों में इस इलाके में सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी और कूटनीतिक खींचतान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

Source: News Agencies

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