एशिया और भारत की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर सुरेखा यादव की जिंदगी में आया निर्णायक मोड़…पूरे देश में हो रही चर्चा?

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लव कुमार सिंह

मेरठ। इस समय पूरे देश में सुरेखा यादव की चर्चा हो रही है. दरअसल वह, एशिया और भारत की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर हैं, जो 36 साल की सेवा के बाद 30 सितंबर 2025 को रिटायर हो रही हैं.

उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने अपने एक्स एकाउंट पर लिखा, “बधाई हो सुरेखा जी, आप एक अग्रदूत रही हैं. लोगों की सेवा में इतने लंबे करियर के बाद आपकी सेवानिवृत्ति पर मेरी ओर से ढेरों शुभकामनाएं. आज आपने हमें याद दिलाया कि आपके जैसे ऐतिहासिक बदलाव लाने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान किया जाना चाहिए. आपके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता.”

महाराष्ट्र के सतारा की सुरेखा यादव ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने का बाद 1989 में रेलवे जॉइन किया था. इसके अगले साल वह सहायक चालक बनीं और 1990 में ट्रेन ड्राइवर बनकर इतिहास रचा.  सुरेखा ने 1996 में पहली बार मालगाड़ी चलाई. साल 2000 में उन्हें प्रमोशन मिला और वे मोटरवुमन बनीं. दस साल बाद उन्होंने घाट ड्राइवर के तौर पर क्वालिफाई किया और मेल व एक्सप्रेस ट्रेनें चलाने लगीं.

13 मार्च 2023 को सोलापुर-मुंबई के बीच पहली वंदे भारत एक्सप्रेस की पहली महिला लोको पायलट बनने का श्रेय भी सुरेखा यादव को ही मिला. ड्राइवर के रूप में आखिरी सफर उन्होंने राजधानी एक्सप्रेस से पूरा किया, जो हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) से सीएसएमटी मुंबई तक गई.

निदी जीवन की बात करें तो 1990 में सुरेखा यादव का विवाह शंकर यादव से हुआ जों महाराष्ट्र पुलिस में इंस्पेक्टर हैं. उनके दो बेटे मुंबई विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के छात्र हैं. सुरेखा यादव ने टेलीविजन धारावाहिक ‘हम किसी से कम नहीं’ में भी काम किया है. 

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शुरुआत में जब सुरेखा यादव ने ट्रेन का हैंडल पकड़ा था तो समाज और सिस्टम दोनों से सवाल उठे थे कि “क्या औरत ट्रेन चला पाएगी?” लेकिन ट्रेन चली और खूब चली, क्योंकि सुरेखा यादव ने जो यात्रा शुरू की थी आगे बढ़ने लगी. उनकी देखादेखी अन्य महिलाएं भी ट्रेन ड्राइवर बनने लगीं.

खासकर पिछले 10 वर्षों में देश में ट्रेन चलाने वाली महिला लोको पायलटों की संख्या में लगभग 5 गुना वृद्धि हुई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार रेलवे में 2024 तक करीब 1828 महिलाएं लोको पायलट के रूप में काम कर रही थीं, जबकि एक दशक पहले तक इनकी संखया मात्र 371 थी. रेलवे में पिछले 10 वर्षों में महिला स्टेशन मास्टरों की संख्या भी लगभग पांच गुना बढ़कर 1500 से ज्यादा हो गई है.

अब तो रेलवे में महिलाएं लोको पायलट और स्टेशन मास्टर के अलावा ट्रैकमैन, सिग्नल मेंटेनेंस, गार्ड और गैंगमैन जैसे क्षेत्रों में भी काम कर रही हैं. अभी भारतीय रेलवे में 1 लाख महिला कर्मचारी हैं, जो कुल वर्कफोर्स का लगभग 8.2 प्रतिशत हैं.

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