By: The Trek News Desk
उत्तर कोरिया ने अमेरिका पर “दुष्ट और शत्रुतापूर्ण रवैया” अपनाने का आरोप लगाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है. यह बयान तब आया जब अमेरिका के वित्त विभाग ने हाल ही में साइबर अपराधों में लिप्त आठ व्यक्तियों और दो कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिका का दावा है कि इन साइबर हमलों से उत्तर कोरिया ने पिछले तीन वर्षों में करीब 3 अरब डॉलर की डिजिटल संपत्ति चुराई, जिसका उपयोग उसने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को वित्तीय मदद देने में किया.
अमेरिकी आरोप:
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, उत्तर कोरिया राज्य-प्रायोजित हैकिंग नेटवर्क चलाता है, जो दुनिया भर में क्रिप्टोकरेंसी चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और आईटी फर्जीवाड़े जैसे अपराधों के ज़रिए धन जुटाता है. इन पैसों को चीन, रूस और अन्य देशों में स्थित बैंकों, फ्रंट कंपनियों और वित्तीय एजेंटों के ज़रिये मनी लॉन्ड्रिंग करके प्योंगयांग तक पहुंचाया जाता है.
अमेरिका का कहना है कि यह जाल इतना संगठित है कि अब तक किसी भी अन्य देश ने इस पैमाने पर डिजिटल चोरी नहीं की है. इन अवैध तरीकों से हासिल रकम का इस्तेमाल उत्तर कोरिया ने अपने मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को गति देने के लिए किया.
उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया:
अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा के दो दिन बाद, उत्तर कोरिया के उप विदेश मंत्री किम उन चोल ने कहा, “अब जब मौजूदा अमेरिकी प्रशासन ने डीपीआरके (उत्तर कोरिया) के प्रति अपनी शत्रुतापूर्ण नीति को साफ कर दिया है, तो हम भी धैर्य के साथ इसका जवाब देने के लिए उचित कदम उठाएंगे.”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रतिबंध और दबाव की नीति उत्तर कोरिया की “रणनीतिक स्थिति” या उसकी “विचारधारा और दृष्टिकोण” को नहीं बदल सकती.

कूटनीतिक पृष्ठभूमि:
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच परमाणु वार्ता 2019 से ठप पड़ी है. उस समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच बातचीत इस बात पर असफल हो गई थी कि क्या अमेरिका अपने प्रतिबंधों में ढील देगा, बदले में उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करेगा.
हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने हाल ही में किम जोंग उन के साथ वार्ता पुनः शुरू करने में रुचि दिखाई थी. लेकिन उत्तर कोरियाई नेता ने किसी भी वार्ता की संभावना को खारिज करते हुए रूस के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना शुरू कर दिया है.
सूत्रों के अनुसार, किम जोंग उन ने रूस को यूक्रेन युद्ध में सैनिकों और सैन्य उपकरणों के रूप में बड़ी सहायता दी है और अब वे अमेरिका-नेतृत्व वाले पश्चिमी गुट के खिलाफ एक साझा मोर्चा बनाने की दिशा में सक्रिय हैं.
अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते तनाव ने एशिया में सुरक्षा परिदृश्य को और जटिल बना दिया है. जहां वाशिंगटन, प्योंगयांग की साइबर गतिविधियों और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को “वैश्विक खतरा” मानता है, वहीं उत्तर कोरिया इसे “अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ आत्मरक्षा” बताता है.
जैसे-जैसे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरियां बढ़ रही हैं, यह स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में उत्तर कोरिया और अमेरिका के संबंधों में और तल्खी देखने को मिल सकती है.
Source: News Agencies
