ईरान में प्रदर्शन तेज़, खामेनेई बोले, उपद्रवियों को उनकी जगह दिखानी होगी

By: The Trek News Desk

ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई ने देशभर में जारी प्रदर्शनों पर पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा है कि “उपद्रवियों को उनकी जगह दिखानी होगी.” उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ख़राब आर्थिक स्थिति के खिलाफ भड़के विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में कम से कम 15 लोगों की मौत की खबर है, जैसा कि मानवाधिकार संगठनों का कहना है.

86 वर्षीय खामेनेई के इस बयान को सुरक्षा बलों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है. एक हफ्ते से जारी ये प्रदर्शन ईरान की मुद्रा रियाल की गिरती कीमत, महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ हो रहे हैं और फिलहाल इनके थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे.

तेहरान में एक सभा को संबोधित करते हुए खामेनेई ने कहा कि सरकार को उन नागरिकों की बात सुननी चाहिए जो आर्थिक परेशानियों से नाराज़ हैं, लेकिन “उपद्रवियों” से बातचीत का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने बिना किसी सबूत के एक बार फिर आरोप लगाया कि इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इसराइल जैसे “विदेशी दुश्मनों” का हाथ है और देश की आर्थिक स्थिति को भी “दुश्मन की साज़िश” बताया.

खामेनेई ने कहा कि कुछ लोग, जिन्हें कथित तौर पर दुश्मन भड़का रहा है, दुकानदारों और व्यापारियों के पीछे छिपकर इस्लाम, ईरान और इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ नारे लगा रहे हैं.

ईरान की शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड, जो सीधे खामेनेई को जवाबदेह है, और उसकी स्वयंसेवी इकाई बसीज पहले भी 2009 के ग्रीन मूवमेंट और 2022 के प्रदर्शनों को सख्ती से कुचल चुकी है. माना जा रहा है कि कट्टरपंथी गुट मौजूदा प्रदर्शनों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन संवाद के ज़रिए हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं.

ईरान के हालिया इतिहास में ऐसे आंदोलनों के बाद अक्सर खूनी कार्रवाई हुई है. 2019 में पेट्रोल कीमतों के विरोध में हुए प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट थी, जबकि 2022 में माहसा अमीनी की मौत के बाद हुए आंदोलन में 500 से ज्यादा लोगों की जान गई और हजारों गिरफ्तार हुए.

शनिवार तड़के दो नई मौतों की खबर सामने आई. क़ोम शहर में एक ग्रेनेड विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई. मीडिया रिपोर्टस ने सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि वह व्यक्ति हमले के इरादे से ग्रेनेड ले जा रहा था. वहीं पश्चिमी ईरान के हरसिन कस्बे में बसीज का एक सदस्य गोली और चाकू से हुए हमले में मारा गया.

रिपोर्टस के अनुसार, प्रदर्शन अब तक ईरान के 31 में से 25 प्रांतों के 170 से अधिक स्थानों तक फैल चुके हैं. संगठन का कहना है कि अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत हुई है और 580 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं.

सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने कुछ इलाकों में हिंसा की बात कही है, लेकिन विस्तृत जानकारी नहीं दी. वहीं कुर्द मानवाधिकार संगठनों और ओस्लो स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं, जिससे कई लोगों की जान गई. सरकार समर्थक मीडिया ने प्रदर्शनकारियों के हथियारबंद होने का दावा किया है, हालांकि इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया.

इन प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान भी अहम माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करता है तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है. इस बयान पर तेहरान में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है.

Source: News Agencies

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