इसराइल लगातार तीन वर्षों से दुनिया का सबसे बड़ा पत्रकारों का हत्यारा: RSF रिपोर्ट

By: The Trek News Desk

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) की नई रिपोर्ट के अनुसार, इसराइल ने 2025 में पत्रकारों की मौतों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी निभाई है, और यह लगातार तीसरे वर्ष के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देश के रूप में उभरा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वर्ष कुल 67 पत्रकारों की हत्या की गई, जिनमें से 29 पत्रकार ग़ज़ा में इसराइली सैनिकों के हाथों मारे गए.

2023 के अक्टूबर महीने में ग़ज़ा युद्ध की शुरुआत के बाद से लगभग 220 पत्रकारों की जान जा चुकी है, जिससे इसराइल को दुनिया का सबसे बड़ा पत्रकारों का हत्यारा बनने का खिताब मिला है.

इसराइल की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत: RSF

RSF के अनुसार, इस वर्ष पत्रकारों की कुल 67 मौतों में इसराइल का योगदान लगभग 43 प्रतिशत था, यानी 29 पत्रकार इसराइली बलों द्वारा मारे गए. इस प्रकार, इसराइल को “पत्रकारों का सबसे बड़ा दुश्मन” करार दिया गया है. रिपोर्ट में एक विशिष्ट घटना का जिक्र किया गया है, जब 25 अगस्त को ग़ज़ा के एक अस्पताल पर एक “डबल-टैप” हवाई हमले में 5 पत्रकार मारे गए, जिनमें रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकार भी शामिल थे.

RSF ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह भी बताया कि 2025 में पत्रकारों की कुल मृत्यु संख्या पिछले वर्ष 2024 (66 मौतें) से थोड़ी बढ़कर 67 हो गई, लेकिन यह संख्या अभी भी 2012 में 142 पत्रकारों की मौत से काफी कम है, जब सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान पत्रकारों पर हमला अधिक था.

ग़ज़ा में पत्रकारों के लिए दमन और प्रतिबंध

ग़ज़ा में विदेशी पत्रकारों के लिए यात्रा प्रतिबंध अभी भी लागू हैं, और वे केवल इसराइल के सैनिकों द्वारा नियंत्रित पर्यटन के माध्यम से ही ग़ज़ा का दौरा कर सकते हैं. मीडिया समूहों और प्रेस स्वतंत्रता संगठनों ने ग़ज़ा में स्वतंत्र पत्रकारों को रिपोर्टिंग की अनुमति देने की लगातार मांग की है, लेकिन इसराइल ने इसे लेकर कोई स्पष्ट कदम नहीं उठाए हैं.

मेक्सिको, यूक्रेन और सूडान में भी पत्रकारों के लिए खतरनाक वर्ष

RSF की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मेक्सिको में 2025 सबसे खतरनाक वर्ष रहा, जहां 9 पत्रकारों की हत्या की गई, जबकि राष्ट्रपति क्लॉडिया शिनबॉम ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कई वादे किए थे. इसके अलावा, यूक्रेन और सूडान भी पत्रकारों के लिए अत्यधिक खतरनाक स्थान रहे, जहां क्रमशः 3 और 4 पत्रकारों की हत्या की गई.

कुल संख्या में गिरावट, लेकिन खतरा बरकरार

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले वर्षों के मुकाबले कुल पत्रकारों की मौत में गिरावट आई है. 2012 में सबसे अधिक 142 पत्रकार मारे गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या 67 रही. इसके बावजूद, हर साल औसतन लगभग 80 पत्रकारों की मौत की दर दर्शाती है कि पत्रकारों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है.

दुनियाभर में पत्रकारों की जेल में बंदी की संख्या

RSF ने यह भी खुलासा किया है कि 503 पत्रकार दुनिया भर के 47 देशों में जेल में बंद हैं. चीन (121 पत्रकार), रूस (48) और म्यांमार (47) पत्रकारों को जेल में रखने वाले प्रमुख देश हैं. इन देशों में पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से अपनी रिपोर्टिंग करने की अनुमति नहीं है, और उन्हें अपनी जान को जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है.

पत्रकारों के लिए खतरा और प्रेस स्वतंत्रता पर हमला

RSF की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पत्रकारों के लिए खतरे का सामना करना दुनिया भर में बढ़ रहा है, चाहे वह शारीरिक हमलों के रूप में हो या फिर जेल में बंदी बनाए जाने के रूप में. रिपोर्ट से यह भी सामने आता है कि पत्रकारों को सुरक्षित रूप से काम करने की अनुमति देना और प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा करना वैश्विक समुदाय के लिए एक अहम मुद्दा बना हुआ है.

Source: News Agencies

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