इमैनुएल मैक्रों तीन दिवसीय चीन दौरे पर, यूक्रेन युद्ध और व्यापार रहेंगे मुख्य एजेंडा

By: The Trek News Desk

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों बुधवार को चीन पहुंचे, जहां वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ाने और व्यापारिक असंतुलन पर चर्चा करेंगे. यह उनका 2017 में पदभार संभालने के बाद चौथा चीन दौरा है.

यूक्रेन में युद्धविराम के लिए बीजिंग की भूमिका पर ज़ोर

मैक्रों की यात्रा का सबसे संवेदनशील पहलू यूक्रेन युद्ध है, जो लगभग चार वर्ष से जारी है. फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने दौरे से पहले कहा कि पेरिस चाहता है कि बीजिंग अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रूस को युद्धविराम पर सहमत होने के लिए राज़ी करे.

बारो के अनुसार, “एक स्थायी सुरक्षा परिषद सदस्य के रूप में हम उम्मीद करते हैं कि चीन, व्लादिमीर पुतिन पर दबाव डालकर युद्ध रोकने में मदद करेगा.”

चीन लगातार शांति वार्ता की बात करता रहा है, लेकिन उसने रूस की 2022 की आक्रामक कार्रवाई की स्पष्ट आलोचना कभी नहीं की. पश्चिमी देशों का आरोप है कि बीजिंग रूस को आर्थिक व सैन्य घटकों के रूप में अप्रत्यक्ष समर्थन दे रहा है.
फ्रांसीसी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से यह आग्रह करने वाले हैं कि चीन रूस को किसी भी प्रकार की सैन्य-संबंधी सहायता देने से बचे.

ज़ेलेंस्की की समानांतर कूटनीति और यूरोप की चिंता

मैक्रों की यात्रा से ठीक पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की पेरिस में थे. उन्होंने यूरोपीय नेताओं को चेतावनी दी कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित शांति फ़ॉर्मूले से यूक्रेन को अपनी जमीन पर समझौता करने का दबाव बन सकता है.

ज़ेलेंस्की ने मैक्रों के साथ वार्ता के बाद कहा कि, “युद्ध का अंत न्यायपूर्ण होना चाहिए.”

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर समेत कई यूरोपीय नेताओं ने भी टेलीफोन पर चर्चा में हिस्सा लिया.

यूरोपीय संघ–चीन व्यापार घाटे पर फोकस

दौरे का बड़ा आर्थिक पहलू यूरोपीय संघ और चीन के बीच बढ़ते व्यापार घाटे से जुड़ा है, जो लगभग 357 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है.
मैक्रों के एक वरिष्ठ सलाहकार ने कहा कि वैश्विक संतुलन के लिए, “चीन को अधिक उपभोग और कम निर्यात पर ध्यान देना चाहिए, जबकि यूरोप को बचत पर निर्भर रहने के बजाय उत्पादन बढ़ाना होगा.”

पांडा कूटनीति और विशेष चेंगदू यात्रा

मैक्रों अपनी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों के साथ शुक्रवार तक चीन में रहेंगे. अंतिम पड़ाव चेंगदू होगा, जहां हाल ही में फ्रांस को उधार दिए गए दो विशाल पांडा वापस भेजे गए थे.
फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, यह शहर-स्तरीय कार्यक्रम चीनी प्रोटोकॉल में “अत्यंत विशेष” माना जाता है और बीजिंग की मैत्रीपूर्ण भावना को दर्शाता है.

पिछली चीन यात्रा में मैक्रों का दक्षिणी शहर ग्वांगझोऊ में विश्वविद्यालय के छात्रों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया था, जहां वे सेल्फ़ी और हाथ मिलाने के लिए कतारों में खड़े रहे.

मैक्रों का यह दौरा यूरोपीय कूटनीति के लिए अहम माना जा रहा है, एक तरफ चीन से रूस पर दबाव बढ़ाने की उम्मीद, और दूसरी ओर व्यापारिक असंतुलन को लेकर गहरी चिंता. आने वाले दिनों में बीजिंग की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि पेरिस के प्रयासों को कितनी सफलता मिलती है.

Source: News Agencies

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