By: The Trek News Desk
जम्मू-कश्मीर सरकार ने वर्ष 2025 में प्राकृतिक आपदाओं से बेघर हुए भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास के लिए एक अहम फैसला लिया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने गुरुवार (5 फरवरी 2026) को बताया कि सरकार ने ऐसे प्रत्येक परिवार को पांच मरला सरकारी ज़मीन 40 वर्षों की लीज़ पर आवंटित करने को मंज़ूरी दे दी है.
विधानसभा में भाजपा विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया के सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिपरिषद के फैसले के बाद 2 जनवरी 2026 को इस संबंध में सरकारी आदेश जारी किया गया. यह ज़मीन उन परिवारों को दी जाएगी जो बाढ़, भूस्खलन, बादल फटने और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण बेघर हो गए हैं.
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह ज़मीन केवल आवासीय उपयोग के लिए दी जाएगी और इसके लिए कोई प्रीमियम नहीं लिया जाएगा. हालांकि, लाभार्थियों को प्रति मरला ₹10 वार्षिक ग्राउंड रेंट देना होगा. यह लीज़ 40 वर्षों के लिए होगी, जिसे नियमों के तहत सक्षम प्राधिकारी की मंज़ूरी से आगे बढ़ाया जा सकता है.
सीएम उमर अब्दुल्लाह ने बताया कि उधमपुर ज़िले में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से प्रभावित 6,400 से अधिक परिवारों को अब तक ₹23.49 करोड़ से ज़्यादा की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है.
उन्होंने कहा कि उधमपुर, चेनानी, रामनगर और लाटी-मरोठी तहसीलों में कुल 6,449 प्रभावित परिवारों को तय मानकों के अनुसार मुआवज़ा दिया गया है.

आंकड़ों का ब्यौरा देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि:
- उधमपुर तहसील में 2,666 परिवारों को लगभग ₹9.32 करोड़,
- चेनानी तहसील में 1,208 परिवारों को ₹5 करोड़ से अधिक,
- रामनगर तहसील में 2,298 परिवारों को ₹7.86 करोड़,
- जबकि लाटी-मरोठी तहसील में 277 परिवारों को ₹1 करोड़ से अधिक की राहत राशि दी गई.
मुख्यमंत्री ने बताया कि नुकसान का आकलन फील्ड टीमों द्वारा किया गया और सभी पात्र मामलों का सत्यापन राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के नियमों के अनुसार हुआ. मंज़ूर मुआवज़े की राशि सीधे तय वित्तीय माध्यमों से प्रभावित परिवारों के खातों में भेजी गई.
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार प्राकृतिक आपदाओं के कारण भूमिहीन हुए परिवारों के स्थायी पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है और इसी दिशा में लीज़ पर सरकारी ज़मीन उपलब्ध कराने जैसे कदम उठाए गए हैं.
Source: News Agencies
