By: The Trek News Desk
देशभर में बड़ी संख्या में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटें खाली रहने के बाद नेशनल बोर्ड ऑफ एग्ज़ामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज़ (NBEMS) ने NEET PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ में अहम संशोधन किया है. बोर्ड ने आरक्षित श्रेणियों के लिए कट-ऑफ को 40 पर्सेंटाइल से घटाकर शून्य पर्सेंटाइल कर दिया है, जबकि सामान्य वर्ग के लिए इसे 50 से घटाकर 7 पर्सेंटाइल कर दिया गया है.
NBEMS द्वारा मंगलवार, 13 जनवरी 2026 को जारी नोटिस के अनुसार यह फैसला दूसरे राउंड की काउंसलिंग पूरी होने के बाद लिया गया. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि देशभर में 18,000 से अधिक पीजी मेडिकल सीटें अब भी खाली हैं, जिनका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है.
सूत्रों के अनुसार, इन सीटों का खाली रहना न केवल चिकित्सा शिक्षा संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि इससे प्रशिक्षित मेडिकल विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों को भी नुकसान पहुंचता है, जो देश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बेहद जरूरी हैं.
NBEMS ने साफ किया कि NEET PG केवल एक रैंकिंग प्रणाली है, जिसका उद्देश्य केंद्रीकृत काउंसलिंग के माध्यम से पारदर्शी और मेरिट आधारित सीट आवंटन सुनिश्चित करना है. पहले के ऊंचे पर्सेंटाइल मानकों के कारण पात्र उम्मीदवारों की संख्या सीमित हो गई थी, जबकि सीटें उपलब्ध थीं.

अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि कट-ऑफ में बदलाव के बावजूद प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट आधारित ही रहेगी. सीटों का आवंटन NEET PG रैंक और उम्मीदवारों की पसंद के आधार पर अधिकृत काउंसलिंग के ज़रिए ही किया जाएगा. किसी भी तरह के सीधे या विवेकाधीन प्रवेश की इजाज़त नहीं होगी.
सूत्रों ने जोर देकर कहा कि शैक्षणिक मानकों से कोई समझौता नहीं किया गया है. संशोधित कट-ऑफ का उद्देश्य केवल उन MBBS डॉक्टरों के लिए पात्रता का दायरा बढ़ाना है, जो पहले से योग्य हैं. पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखी जाएगी.
गौरतलब है कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने 12 जनवरी को औपचारिक रूप से NBEMS से कट-ऑफ में संशोधन की मांग की थी. संगठन का कहना था कि सीटों के खाली रहने से न केवल मेडिकल शिक्षा को नुकसान हो रहा है, बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयास भी प्रभावित हो रहे हैं.
Source: News Agencies
