By: The Trek News Desk
रूस-यूक्रेन युद्ध के लगभग चार साल पूरे होने से पहले तनाव फिर बढ़ गया है. रविवार को यूक्रेन द्वारा किए गए ड्रोन हमले में रूस के ब्लैक सी तट पर स्थित एक अहम बंदरगाह पर आग लग गई. अधिकारियों के अनुसार, यह हमला अमेरिकी मध्यस्थता में होने वाली नई शांति वार्ता से ठीक पहले हुआ.
रूस के क्रास्नोदार क्षेत्र के तामान बंदरगाह को निशाना बनाया गया. क्षेत्रीय गवर्नर ने बताया कि हमले में दो लोग घायल हुए हैं. ड्रोन हमले से एक तेल भंडारण टैंक, गोदाम और कुछ टर्मिनलों को नुकसान पहुंचा है.
उधर, यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र में रूसी ड्रोन के मलबे से नागरिक और परिवहन ढांचे को नुकसान पहुंचा. स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, हमले के कारण बिजली और पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई.
विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन द्वारा रूस के ऊर्जा ठिकानों पर लंबी दूरी के ड्रोन हमले का उद्देश्य मॉस्को की तेल निर्यात आमदनी को प्रभावित करना है. वहीं रूस पर आरोप है कि वह यूक्रेन के पावर ग्रिड को निशाना बनाकर आम नागरिकों को सर्दियों में बिजली, पानी और हीटिंग से वंचित करना चाहता है.
इन हमलों के बीच मंगलवार और बुधवार को जिनेवा में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में नई वार्ता प्रस्तावित है. यह बैठक 22 फरवरी को रूसी आक्रमण चार साल पूरे होने से ठीक पहले हो रही है.
शनिवार को जर्मनी में आयोजित म्यूनिख सिक्योरिटी कांफ्रेंस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा गारंटी को लेकर अभी भी कई सवाल बाकी हैं. उन्होंने यह भी पूछा कि अमेरिका द्वारा प्रस्तावित मुक्त व्यापार क्षेत्र डोनबास में कैसे लागू होगा, जबकि रूस शांति समझौते के लिए कीव से उस क्षेत्र को छोड़ने की मांग कर रहा है.

ज़ेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका जल्द से जल्द समझौता चाहता है और सभी मुद्दों पर एक साथ हस्ताक्षर करना चाहता है, जबकि यूक्रेन पहले ठोस सुरक्षा गारंटी चाहता है.
अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति की वरिष्ठ सदस्य जीन शाहीन ने भी यूक्रेन की चिंताओं का समर्थन किया. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी शांति समझौते में वास्तविक सुरक्षा गारंटी नहीं होगी, तो भविष्य में फिर संघर्ष की आशंका बनी रहेगी.
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख कजा कलास ने कहा कि रूस युद्ध के मैदान में जो हासिल नहीं कर सका, उसे वह कूटनीतिक स्तर पर पाना चाहता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिबंध हटाने और संपत्तियां अनफ्रीज करने जैसे फैसले यूरोप के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.
कैलास ने ज़ोर देकर कहा कि स्थायी शांति के लिए रूस को भी रियायतें देनी होंगी. इससे पहले अमेरिका की अगुवाई में अबू धाबी में हुई दो दौर की वार्ताएं डोनबास क्षेत्र के भविष्य जैसे जटिल मुद्दों पर सहमति नहीं बना सकीं.
रूस-यूक्रेन संघर्ष के चौथे वर्ष में प्रवेश से पहले हो रही ये घटनाएं संकेत दे रही हैं कि युद्धविराम और स्थायी समाधान की राह अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है.
Source: News Agencies
