बिहार के समस्तीपुर में सड़क किनारे मिलीं VVPAT पर्चियां, प्रशासन ने कहा, ‘ये मॉक पोल की थी’

By: The Trek News Desk

लोकसभा चुनाव के बीच बिहार के समस्तीपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सड़क किनारे सैकड़ों VVPAT (वोटर वेरीफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल) पर्चियां बिखरी हुई मिलीं. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हंगामा मच गया. विपक्षी राजद (RJD) ने आरोप लगाया कि ये पर्चियां EVM मशीनों से निकाली गई हैं.

हालांकि जिला प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये पर्चियां मतदान से पहले की मॉक पोल प्रक्रिया की थीं, जिनका वास्तविक मतदान से कोई संबंध नहीं है.

प्रशासन का बयान

समस्तीपुर के जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने बताया कि जांच में पाया गया कि ये पर्चियां मॉक पोल के दौरान निकली थीं. मतदान से पहले मशीनों की जांच के लिए यह प्रक्रिया की जाती है.
“कुछ पर्चियां कटने के बाद सही तरीके से नष्ट नहीं की गई थीं, जिसके कारण वे बाहर मिलीं. संबंधित मतदान कर्मियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी,” डीएम ने कहा. उन्होंने यह भी बताया कि सभी प्रत्याशियों को इस घटना की जानकारी दे दी गई है.

वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में स्थानीय लोग सड़कों पर बिखरी VVPAT पर्चियां उठाते दिखे, जिन पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के चिह्न मुद्रित थे. इस पर RJD नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता पर चिंता जताई.

निर्वाचन आयोग की कार्रवाई

घटना के बाद निर्वाचन आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित सहायक रिटर्निंग अधिकारी (ARO) को निलंबित कर दिया.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इस मामले में लापरवाही बरतने पर एआरओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और जिलाधिकारी को विस्तृत जांच रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए गए हैं.

मतदान प्रक्रिया पर कोई असर नहीं

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस घटना का वास्तविक मतदान या परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है.
“VVPAT और EVM की मॉक टेस्टिंग हर निर्वाचन क्षेत्र में मतदान शुरू होने से पहले की जाती है. इस प्रक्रिया के बाद सभी डेटा को मिटा दिया जाता है,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया.

क्या है मॉक पोल?

मॉक पोल एक परीक्षण प्रक्रिया है, जिसमें मतदान शुरू होने से पहले EVM और VVPAT मशीनों की कार्यक्षमता की जांच की जाती है. इसमें पार्टी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में परीक्षण वोट डाले जाते हैं ताकि मशीनों में किसी तकनीकी खामी की पहचान हो सके.

यह घटना भले ही प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि मतदान की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर कोई असर नहीं पड़ा है.

Source: News Agencies

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