सुपरमैसिव ब्लैक होल्स की विशालता पर सवाल, वैज्ञानिकों ने दी नई खोज

By: The Trek News Desk

सुपरमैसिव ब्लैक होल्स की विशालता पर नई खोज ने अब तक के विज्ञान के सिद्धांतों को चुनौती दी है. एक नए अध्ययन में पता चला है कि सुपरमैसिव ब्लैक होल्स उतने बड़े नहीं होते, जितना पहले माना जाता था.

ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (ANU) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने गुरुवार को बताया कि एक दूरस्थ क्वासर के अध्ययन के दौरान यह हुआ. क्वासर, एक अत्यधिक चमकदार और सक्रिय गैलेक्सी का कोर होता है, और इसकी केंद्र में स्थित ब्लैक होल का द्रव्यमान केवल लगभग एक अरब सूरज के बराबर पाया गया, जो अब तक के अनुमानित द्रव्यमान का दसवां हिस्सा है.

साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का नेतृत्व


यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन और अन्य यूरोपीय देशों के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया था. उन्होंने 12 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित इस गैलेक्सी का अध्ययन किया.

इस शोध में यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) में स्थापित अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया.

असिस्टेंट प्रोफेसर क्रिश्चियन वोल्फ, जिन्होंने इस अध्ययन की अगुवाई की, ने ANU रिपोर्टर से कहा, “क्वासर की अत्यधिक रोशनी के बावजूद, इसके केंद्र में स्थित ब्लैक होल का द्रव्यमान केवल एक अरब सूरज के बराबर पाया गया.”

उन्होंने यह भी बताया कि इसके बजाय यह ब्लैक होल अपेक्षाकृत तेज़ी से घूर्णन करने के बजाय गैस को बाहर की ओर उड़ा रहा था, और यह प्रक्रिया प्रकाश की तीव्रता द्वारा प्रेरित हो रही थी.

Photo Credit: AFP

ब्लैक होल का द्रव्यमान और उसके विकास को लेकर नई जानकारी


2024 में इस ब्लैक होल का पता वोल्फ और उनके सहयोगियों ने ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (ANU) के साथ मिलकर किया था.

इस खोज को लेकर साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सेब होनिक ने कहा कि यह खोज एक पुराने रहस्य को सुलझाती है.

उन्होंने प्रेस एसोसिएशन (PA) को बताया, “हम सालों से यह सोच रहे थे कि इतनी युवा गैलेक्सियों में इतनी विशाल सुपरमैसिव ब्लैक होल्स कैसे मिल रही हैं, जबकि इन्हें इतनी कम समय में इतना बड़ा होने का मौका नहीं मिलना चाहिए था.”

अंतरिक्षीय रेडिएशन का प्रभाव


इस अध्ययन में “ग्रैविटी+” उपकरण का इस्तेमाल किया गया, जो दुनिया के चार सबसे बड़े टेलीस्कोपों से प्रकाश को इकठ्ठा करता है. टीम ने गैलेक्सी के गर्म गैसों का विश्लेषण किया जो ब्लैक होल में समाहित हो रही थीं.

उनके निष्कर्षों के अनुसार, तीव्र रेडिएशन गैस को बाहर की ओर उड़ा रहा है, जिससे ब्लैक होल को जितनी तेजी से द्रव्यमान प्राप्त होना चाहिए था, वह नहीं हो पा रहा है.

प्रोफेसर होनिक ने PA से कहा, “इसे एक ब्रह्मांडीय हेयरड्रायर की तरह समझें, जो सबसे ज्यादा पावर पर सेट है. इसके चारों ओर की रेडिएशन हर उस चीज़ को उड़ा देती है जो इसके पास आती है.”

वैज्ञानिक मॉडल्स में संभावित बदलाव
यह खोज यह संकेत देती है कि वैज्ञानिकों को ब्लैक होल्स के मापने के तरीकों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है, और इससे ब्रह्मांडीय विकास के मॉडल्स को नया रूप भी मिल सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इस नए दृष्टिकोण से भविष्य में ब्लैक होल्स और उनके विकास को लेकर किए गए शोधों में नई दिशा मिल सकती है.

Source: Australian National University

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