भारत ने रचा इतिहास: इसरो ने ‘बाहुबली’ रॉकेट से देश का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 सफलतापूर्वक लॉन्च किया

By: The Trek News Desk

भारत की अंतरिक्ष यात्रा में आज एक और ऐतिहासिक पल दर्ज हो गया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार, 2 नवंबर 2025, को देश का अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया. यह प्रक्षेपण इसरो के शक्तिशाली रॉकेट LVM3-M5, जिसे ‘बाहुबली’ कहा जाता है, के माध्यम से किया गया.

लॉन्च की सफलता

श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शाम 5:26 बजे, 43.5 मीटर ऊंचे LVM3-M5 रॉकेट ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी.

भारत की ‘स्वदेशी ताकत’ का प्रदर्शन

यह पहली बार है जब इसरो ने इतनी भारी श्रेणी का उपग्रह पूरी तरह स्वदेशी रॉकेट से लॉन्च किया है. इससे पहले 4,000 किलोग्राम से अधिक वजन वाले उपग्रहों के लिए इसरो को फ्रांस की एरियानस्पेस (Arianespace) की सेवाएं लेनी पड़ती थीं.
2018 में इसरो ने GSAT-11 (5,854 किग्रा) उपग्रह को फ्रेंच गयाना से लॉन्च किया था. लेकिन अब CMS-03 के साथ भारत ने इस निर्भरता से खुद को मुक्त कर लिया है.

CMS-03: नई संचार क्रांति की शुरुआत

CMS-03 एक अत्याधुनिक मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सैटेलाइट है, जो भारत और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली संचार सेवाएं प्रदान करेगा.
हालांकि इसके कुछ अनुप्रयोगों को रक्षा और निगरानी से भी जोड़ा जा रहा है, इसरो ने इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. एजेंसी के अनुसार, यह उपग्रह भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी को नए स्तर पर ले जाएगा.

बहुबली’ रॉकेट की तकनीकी क्षमता

LVM3-M5, जिसे GSLV Mk III भी कहा जाता है, इसरो का सबसे शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल है. इसमें तीन मुख्य चरण हैं –

  1. S200 ठोस ईंधन बूस्टर, जो उड़ान की शुरुआत में आवश्यक थ्रस्ट प्रदान करते हैं.
  2. L110 लिक्विड स्टेज, जिसमें दो स्वदेशी विकास इंजन लगे हैं.
  3. C25 क्रायोजेनिक स्टेज, जो ऊपरी कक्षा तक उपग्रह को पहुंचाने के लिए सबसे शक्तिशाली बल देता है.

इस रॉकेट की क्षमता GTO में 4,000 किग्रा और लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 8,000 किग्रा तक पेलोड भेजने की है.

चंद्रयान-3 के बाद एक और गौरवपूर्ण सफलता

यह LVM3 रॉकेट की पांचवीं परिचालन उड़ान थी. इससे पहले इसी रॉकेट ने चंद्रयान-3 मिशन को 2023 में सफलतापूर्वक चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास उतारा था, जिससे भारत दुनिया का पहला देश बना जिसने इस क्षेत्र में सफल लैंडिंग की.
CMS-03 के साथ, इसरो ने एक बार फिर अपनी तकनीकी क्षमता और वैश्विक नेतृत्व को सिद्ध किया है.

Source: ISRO

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