भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, भारत करता है शांति और संवाद का समर्थन: जयशंकर

By: The Trek News Desk

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत ने एक बार फिर शांति और कूटनीतिक समाधान पर ज़ोर दिया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार (9 मार्च 2026) को संसद के दोनों सदनों में दिए गए बयान में कहा कि भारत हमेशा से तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का पक्षधर रहा है.

राज्यसभा और लोकसभा में दिए अपने बयान में जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है. भारत का मानना है कि इस तरह के विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के ज़रिए ही संभव है. उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए.

विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और भलाई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं और स्थिति का लगातार आकलन किया जा रहा है. इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने भी बैठक कर क्षेत्रीय हालात और वहां फंसे भारतीयों की स्थिति की समीक्षा की है.

जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है. यहां से भारत को तेल और गैस की बड़ी आपूर्ति होती है, जबकि खाड़ी क्षेत्र भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार भी है, जहां सालाना करीब 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है.

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में व्यापारिक जहाज़ों पर हुए हमलों का असर भारतीय नाविकों पर भी पड़ा है. कुछ भारतीय समुद्री कर्मियों के हताहत होने की ख़बर है और एक नाविक अब भी लापता बताया जा रहा है.

विदेश मंत्रालय ने जनवरी से ही कई ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए भारतीय नागरिकों को ईरान की गैर-ज़रूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है. साथ ही वहां मौजूद भारतीयों से भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है.

जयशंकर ने बताया कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, जबकि ईरान में भी हज़ारों भारतीय पढ़ाई और रोज़गार के सिलसिले में मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है.

विदेश मंत्री के अनुसार भारतीय दूतावासों ने ज़रूरतमंद नागरिकों को स्थानांतरण और निकासी में मदद की है. कुछ भारतीयों को पड़ोसी देशों जैसे आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटने की सुविधा भी दी गई. अब तक करीब 67,000 भारतीय नागरिकों को क्षेत्र से वापस लाया जा चुका है.

स्थिति पर नज़र रखने और भारतीयों की मदद के लिए विदेश मंत्रालय ने एक विशेष कंट्रोल रूम भी तैयार किया है. वहीं भारतीय नाविकों की सहायता के लिए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने त्वरित प्रतिक्रिया टीम का गठन किया है.

जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र के कई नेताओं से बातचीत की है, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान, जॉर्डन और इसराइल के नेता शामिल हैं. इन सभी देशों ने वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिया है.

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मानवीय आधार पर भारत ने 4 मार्च को ईरानी जहाज़ ‘आईआरआईएस लावन’ को कोच्चि बंदरगाह पर आने की इजाज़त दी थी.

अंत में जयशंकर ने कहा कि मौजूदा हालात में भारत अपने नागरिकों और ऊर्जा ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है. सरकार का प्रयास है कि इस संवेदनशील स्थिति में भारतीयों के हितों और ऊर्जा सुरक्षा दोनों की रक्षा की जा सके.

Source: News Agencies

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