By: The Trek News Desk
बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में शुमार और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया का लंबी बीमारी के बाद 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया. मंगलवार सुबह करीब 6 बजे उन्होंने ढाका के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनके निधन से बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है.
ख़ालिदा ज़िया की हालत बीते कुछ दिनों से काफी नाज़ुक बनी हुई थी. डॉक्टरों के अनुसार उन्हें हृदय रोग, किडनी से जुड़ी समस्याओं और निमोनिया सहित कई गंभीर बीमारियां थीं. उम्र और कमज़ोर स्वास्थ्य के चलते उन्हें एक साथ कई उपचार देना संभव नहीं था और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था.
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सोशल मीडिया पर उनके निधन की पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी ने अपनी सबसे प्रिय नेता को खो दिया है. जैसे ही यह खबर सामने आई, ढाका स्थित अस्पताल के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को तैनात किया गया.
ख़ालिदा ज़िया ने 1991 में बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनकर इतिहास रचा था. उन्होंने लगभग 20 वर्षों बाद हुए पहले लोकतांत्रिक चुनाव में जीत हासिल की थी. वह पूर्व राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान की पत्नी थीं, जिनकी 1981 में सैन्य तख्तापलट के दौरान हत्या कर दी गई थी. इसके बाद ख़ालिदा ज़िया ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे बीएनपी की शीर्ष नेता बनकर उभरीं.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ख़ालिदा ज़िया को एक कठोर और अडिग नेता के रूप में जाना जाता था. 1980 के दशक में सैन्य शासक हुसैन मोहम्मद इरशाद के दौर में उन्होंने विवादित चुनावों का बहिष्कार कर अपनी अलग पहचान बनाई. पुरुष-प्रधान राजनीति में उन्होंने मज़बूती से अपनी जगह बनाई और देश की सबसे ताकतवर नेताओं में शामिल हुईं.
उनके पहले कार्यकाल को महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सराहा गया. इसी दौरान संसदीय लोकतंत्र को फिर से बहाल किया गया. हालांकि बाद के कार्यकालों में उन्हें भ्रष्टाचार और चुनावी अनियमितताओं के आरोपों का भी सामना करना पड़ा.
बीते 16 वर्षों में, जब अवामी लीग सत्ता में रही, ख़ालिदा ज़िया विपक्ष की सबसे बड़ी आवाज़ बनी रहीं. उन्होंने 2014 के आम चुनावों का बहिष्कार किया और बाद में भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल भी गईं. उन्होंने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था.
पिछले साल बड़े पैमाने पर हुए जन आंदोलनों के बाद शेख हसीना के सत्ता से हटने और देश छोड़ने के बाद ख़ालिदा ज़िया को रिहा किया गया था. बीएनपी ने हाल ही में संकेत दिया था कि वह आगामी आम चुनावों में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं.
ख़ालिदा ज़िया के निधन पर अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें लोकतांत्रिक आंदोलन की प्रतीक बताया. वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर दुख जताया और बांग्लादेश के विकास तथा भारत-बांग्लादेश संबंधों में उनके योगदान को याद किया.
उनके अंतिम समय में परिवार के सदस्य, जिनमें उनके बेटे तारिक रहमान भी शामिल थे, उनके साथ मौजूद थे. बीएनपी ने देशवासियों से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की अपील की है.
Source: News Agencies

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