खाड़ी में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा तेज़, ट्रंप ने दी ईरान को चेतावनी

By: The Trek News Desk

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि उसके पास परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए अब ज़्यादा समय नहीं बचा है. ट्रंप का यह बयान उस वक्त आया है जब अमेरिका ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ाई है.

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि एक “विशाल नौसैनिक बेड़ा” पूरी ताकत और उद्देश्य के साथ ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने दावा किया कि यह तैनाती पहले वेनेजुएला में की गई अमेरिकी कार्रवाई से भी बड़ी है और ज़रूरत पड़ने पर तेज़ी व कठोरता के साथ मिशन को अंजाम देने में सक्षम है.

ईरान की ओर से संयुक्त राष्ट्र में उसके मिशन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तेहरान आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर बातचीत के लिए तैयार है. हालांकि, चेतावनी भी दी गई कि अगर दबाव बनाया गया तो ईरान अपने बचाव में “अभूतपूर्व” जवाब देगा.

इस बीच, अमेरिका में स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (HRANA) का कहना है कि ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई में अब तक 6,000 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल हैं. संगठन के अनुसार, इंटरनेट बंद होने के बावजूद हजारों अन्य मौतों की रिपोर्टों की जांच जारी है. नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स समूह ने मृतकों की संख्या 25,000 से ज्यादा होने की आशंका जताई है.

ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार बनाने की इजाज़त नहीं देगा. उन्होंने जून 2025 में ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए चेताया कि अगली कार्रवाई और भी गंभीर हो सकती है.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी रुख की आलोचना करते हुए कहा कि सैन्य धमकियों के जरिए कूटनीति संभव नहीं है. उनके अनुसार, अगर वाशिंगटन बातचीत चाहता है तो उसे धमकियां और अव्यावहारिक शर्तें छोड़नी होंगी.

यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा पहले ही मध्य पूर्व पहुंच चुका है. अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने भी इस तैनाती की पुष्टि की है.

जून 2025 में हुए अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने कतर में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइलें दागी थीं, जिसे ट्रंप ने “कमज़ोर और अपेक्षित प्रतिक्रिया” करार दिया था. ईरान का दावा है कि उसके परमाणु ठिकानों से ज़रूरी सामग्री पहले ही हटा ली गई थी, इसलिए नुकसान सीमित रहा.

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीति को चिंता में डाल दिया है.

Source: News Agencies

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