एआई और डीपफेक कंटेंट पर सरकार सख्त, तीन घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट

By: The Trek News Desk

केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार और डीपफेक जैसे सिंथेटिक कंटेंट को लेकर नियमों को और कड़ा कर दिया है. नए प्रावधानों के तहत सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को अब किसी सक्षम प्राधिकरण या अदालत द्वारा चिन्हित ऐसे कंटेंट को महज़ तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा.

मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 में संशोधन को अधिसूचित किया. ये संशोधित नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे.

संशोधित नियमों में पहली बार एआई-जनरेटेड और सिंथेटिक कंटेंट की साफ परिभाषा दी गई है. इसके तहत ऐसे ऑडियो, वीडियो या ऑडियो-विज़ुअल कंटेंट को शामिल किया गया है, जिन्हें एआई की मदद से तैयार या बदला गया हो और जो देखने या सुनने में असली या प्रामाणिक प्रतीत होते हों. हालांकि, सामान्य संपादन, और शैक्षणिक या डिजाइन से जुड़े सद्भावनापूर्ण बदलावों को इससे बाहर रखा गया है.

नए नियमों के अनुसार, एआई से तैयार सामग्री को अब अन्य डिजिटल सूचनाओं के जैसा ही माना जाएगा. इसका मतलब यह है कि गैरकानूनी गतिविधियों के निर्धारण में एआई कंटेंट पर भी वही कानूनी मानक लागू होंगे, जो दूसरे ऑनलाइन सूचनाओं पर होते हैं.

सरकार या अदालत के आदेश पर कार्रवाई की समय-सीमा को भी काफी कम कर दिया गया है. पहले जहां प्लेटफॉर्म्स को 36 घंटे का समय मिलता था, अब उन्हें तीन घंटे के भीतर आदेश का पालन करना होगा.

नियमों में यह भी कहा गया है कि जो प्लेटफॉर्म एआई या सिंथेटिक कंटेंट बनाने या साझा करने की सुविधा देते हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसा कंटेंट स्पष्ट और प्रमुख रूप से लेबल किया गया हो. साथ ही, तकनीकी रूप से संभव होने पर उसमें स्थायी मेटाडाटा या पहचान चिह्न (आईडेंटिफायर) भी जोड़े जाएं.

सरकार ने अवैध एआई कंटेंट पर सख्त रुख़ अपनाते हुए कहा है कि प्लेटफॉर्म्स को स्वचालित टूल्स का इस्तेमाल कर ऐसे कंटेंट को रोकना होगा, जो ग़ैरकानूनी, भ्रामक, बिना सहमति के तैयार किया गया हो या फर्जी दस्तावेज़, बाल यौन शोषण सामग्री, विस्फोटक या पहचान की नकल से जुड़ा हो.

इसके अलावा, एक बार एआई कंटेंट पर लेबल या मेटाडाटा लगाए जाने के बाद, इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स उसे हटाने या दबाने की अनुमति नहीं दे सकेंगे.

सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा बढ़ाना और एआई के दुरुपयोग से आम लोगों को बचाना है.

Source: News Agencies

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