By: The Trek News Desk
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या के बाद कश्मीर घाटी में भड़के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने सोमवार को कई इलाकों में सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए श्रीनगर समेत विभिन्न जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.
रिपोर्टस के अनुसार, श्रीनगर के प्रमुख स्थल लाल चौक स्थित घंटाघर को चारों ओर से बैरिकेड लगाकर सील कर दिया गया है. शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है ताकि किसी भी प्रकार की भीड़ या प्रदर्शन को रोका जा सके.
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी 2026 को तेहरान में हुए संयुक्त अमेरिका-इसराइल हवाई हमले में खामेनेई की मौत हुई थी. इसकी पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया ने 1 मार्च को की, जिसके बाद दुनिया के कई हिस्सों की तरह कश्मीर में भी शोक और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.
घाटी, जहां लगभग 15 लाख शिया समुदाय के लोग निवास करते हैं, उसमें लाल चौक, सईदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा सहित कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने मातम मनाते हुए अमेरिका और इसराइल के खिलाफ नारेबाज़ी की.
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि एहतियात के तौर पर शहर के प्रमुख चौराहों और प्रवेश मार्गों पर कंटीले तार और बैरिकेड लगाए गए हैं. शिया बहुल इलाकों में भी इसी तरह की पाबंदियां लागू की गई हैं.
इस बीच, मुताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के अध्यक्ष मीरवाइज़ उमर फारूक़ ने एक दिन के बंद का आह्वान किया है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एकजुटता और शांति के साथ इस बंद का पालन करें. उनके इस आह्वान को कई राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है. पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी बंद के समर्थन में बयान जारी करते हुए इसे शोक और एकजुटता का दिन बताया.
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम के रूप में सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों को दो दिनों के लिए बंद रखने का फैसला लिया है. अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला छात्रों की सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है.
फिलहाल घाटी में हालात पर प्रशासन की कड़ी नज़र बनी हुई है और सुरक्षा बल लगातार गश्त कर रहे हैं.
Source: News Agencies
